दोस्तों,
अभी कुछ महीने पहले की बात है जब भारतीय क्रिकेट टीम वेस्टइडींज के दौरे पे थी और पाकिस्तान टीम इंगलैंड के।
दोनों टीमों में टेस्ट क्रिकेट में . बनने की होड़ थी।
भारतीय क्रिकेट प्रेमी ये मानके चल रहे थे कि टीम इडिंया आसानी से वेस्टइडींज को हरा के .
टीम बन जाएगी।लेकिन क्रिकेट की अनिश्चितता ने फिर कमाल किया,जहाँ भारत केवल दो ही टेस्ट जीत पाया वहीं पाकिस्तान दूसरे और तीसरे टेस्ट में मिली करारी हार के सदमे से उबर कर केवल चौथा टेस्ट जीता अपितु सीरिज भी से ड्रा कराने में सफल हुआ।जिसके परिणाम स्वरूप पाकिस्तान भारत को पीछे छोड़कर टेस्ट क्रिकेट की शीर्ष टीम बन गयी।
किन्तु हद तो तब हो गयी जब पाकिस्तान की मीडिया ने अपने कार्टून में पाकिस्तानी कप्तान को बादशाह और विराट कोहली को वजीर के रुप में छापकर भारत का मजाक उड़ाया
अपने आक्रामक तेवर के लिए मशहूर विराट ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी अपने और टीम के गुस्से को प्रदर्शन में परिवर्तित कर दिया,और दो महीने के भीतर ही भारत ने अपनी घरेलू मैदान पे न्यूज़ीलैंड का सफ़ाया करके पाकिस्तान से . का ताज छीन लिया।भारतीय टीम का शीर्ष पर पहुँचना ही कोई इत्तफ़ाक है और ही कोई तुक्का।ये हमारे खिलाड़ियों के कड़ी मेहनत,विराट कोहली और कोच अनिल कुम्बले की कुशल रणनीति का नतीजा है।अभी टीम इडिंया को १० टेस्ट मैच अपने ही जमीन पर खेलना है ,जिससे कि उसके ताज पर कोई विशेष खतरा नहीं है लेकिन यदि सही मायने में टीम इडिंया . बनना चाहती है तो उसे विदेशों में भी मैच जीतना सीखना होगा।
इसका एक उपाय मुझे ये समझ में आता है कि जब भारत में मैच हो तो सभी मैच तेज गेंदबाजी को मदद करने वाली पिचों पर खेली जाय और जब विदेशों में मैच हो तो स्पिन गेंदबाज़ी को मदद देने वाली पिचों पर मैच हो।
इसका एक फायदा तो ये होगा कि घरुेलू टीम का लाभ कुछ कम हो जाएगा और दर्शकों का रुझान भी टेस्ट मैच में लौटेगा और मैच पूरे पाँच दिन चलेगें।

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राकेश श्रीवास्तव

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