पिछले तीन महीने से चल रहा सुपरहिट फैमिली ड्रामा अपने खात्मे की ओर बढ़ रहा है।सबसे बड़ी बात है इस पार्टी का नाम ‘समाजवादी पार्टी ‘,इस पार्टी ने समाजवाद शब्द का मतलब बदल दिया है।समाजवादी पार्टी में समाजवाद छोड़कर बाकी सब है,इसमें पूंजीपति अमर सिंह है,सहारा श्री सुब्रत राय थे,इसमें अनिल अम्बानी भी थे,बिग बी भी इसका हिस्सा रहे।ये पार्टी अपना लक्ष्य खो चुकी है,केवल पैसा के लूट का मसला है,जिसको इसमें कम मिला वह परेशान है।
मुलायम सिंह ने अखिलेश को अपना उत्तराधिकारी तो घोषित कर दिया पर बहुत कम ही एैसे सीनियर नेता थे जो अखिलेश को मुख्यमंत्री मानते थे।अपने पिता,चाचा तथा अन्य नेताओं के साये से बाहर आकर स्वंय का निर्णय लेने में अखिलेश को लगभग पाँच साल लग गये,लेकिन उनका यह कदम शिवपाल और मुलायम को कतई अच्छा नही लगा एक स्वर में उनका विरोध करना शुरु कर दिया ।अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के एकमात्र एैसे नेता है जिनको हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है।उनके विरोधी भी यह मानते है कि अखिलेश ईमानदार हैं,मेहनती हैं और पार्टी में ईमानदार लोगों को रखना चाहते है।इस ड्रामे का अजांम क्या होगा यह अभी समय के गर्भ में है लेकिन ईमानदारी की राजनीति करना इस तथाकथित समाजवादी पार्टी में सम्भव नहीं है।अगर अखिलेश को आगे बढ़ना है तो उन्हें अपने सिद्धांतो से समझौता न करते हुए अकेले आगे बढ़ना चाहिए ,सत्ता रहे या जाय।
गुंडो, अपराधियों की सरकार चलाने से अच्छा विपक्ष में बैठना है।

गुड लक अखिलेश यादवजी

 

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